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शुक्रवार संतोषी माता व्रत कथा: सुख-समृद्धि और शांति का व्रत

santoshimaa
संतोषी माता, संतोष और सुख की देवी मानी जाती हैं। उनके व्रत का पालन करने से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं, और परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। शुक्रवार को संतोषी माता का व्रत रखने और कथा सुनने का विशेष महत्व है।

व्रत कथा

पुराने समय की बात है। एक गांव में एक वृद्ध महिला के सात पुत्र थे। वे सभी अलग-अलग स्वभाव के थे। उनमें से छह पुत्र मेहनती और माता-पिता के आज्ञाकारी थे, जबकि सबसे छोटा पुत्र आलसी और कामचोर था। वह हमेशा दूसरों पर निर्भर रहता और अपनी जिम्मेदारियों से भागता। एक दिन, छोटे बेटे ने अपनी मां से अधिक भोजन की मांग की। मां ने उसे डांटा और कहा, "तुम्हें जितना काम करोगे, उतना ही भोजन मिलेगा।" यह सुनकर वह नाराज होकर घर छोड़कर चला गया। घूमते-घूमते वह एक शहर पहुंचा, जहां उसे एक साहूकार के यहां काम मिल गया। कुछ समय बाद उसने एक दिन साहूकार की बेटी से विवाह कर लिया। विवाह के बाद उसका जीवन सुखद हो गया, लेकिन उसका स्वभाव नहीं बदला। उसकी पत्नी बहुत ही धार्मिक और भक्त थी। एक दिन उसने संतोषी माता की महिमा सुनी और माता के व्रत का संकल्प लिया। उसने 16 शुक्रवार का व्रत करने का निश्चय किया।

व्रत और माता की कृपा

उसने हर शुक्रवार को उपवास रखा, संतोषी माता की पूजा की, और गुड़-चने का भोग लगाकर कथा सुनी। धीरे-धीरे माता की कृपा से उसके पति का स्वभाव बदलने लगा। वह मेहनती और ईमानदार हो गया। व्रत के 16वें शुक्रवार को संतोषी माता प्रकट हुईं और भक्त की श्रद्धा से प्रसन्न होकर वरदान दिया। माता की कृपा से उनके जीवन में धन-धान्य, सुख-शांति, और संतोष का वास हुआ।

कष्ट और समाधान

कुछ समय बाद, युवक की भाभियों ने ईर्ष्या से उसकी पत्नी को परेशान करना शुरू कर दिया। उसकी पत्नी ने संतोषी माता का व्रत रखने का निश्चय किया। वह प्रत्येक शुक्रवार को उपवास करती और माता का विधिपूर्वक पूजन करती। उसने कथा सुनी और संतोषी माता से प्रार्थना की। धीरे-धीरे उसकी सभी परेशानियाँ दूर हो गईं, और परिवार में सुख-शांति आ गई।

संतोषी माता व्रत की विधि

  1. व्रत का नियम:
    1. व्रतधारी को शुक्रवार को व्रत रखना चाहिए और सादा भोजन करना चाहिए।
    2. खट्टे पदार्थों का सेवन वर्जित है।
  2. पूजन सामग्री: माता की मूर्ति या चित्र, लाल वस्त्र, चावल, गुड़, चने, धूप, दीपक।
  3. पूजन विधि:
    1. शुक्रवार को सुबह स्नान कर संतोषी माता की मूर्ति स्थापित करें।
    2. माता को गुड़ और चने का भोग लगाएँ।
    3. संतोषी माता की कथा सुनें।
    4. आरती करें और प्रसाद बाँटें।

कथा से शिक्षा

  1. संतोष का महत्व: जीवन में संतोष और धैर्य रखने से हर कठिनाई दूर होती है।
  2. श्रद्धा और भक्ति: श्रद्धा और भक्ति से माता की कृपा प्राप्त होती है।
  3. नियमों का पालन:व्रत के दौरान नियमों का पालन करने से इच्छाएँ पूरी होती हैं।

"जय संतोषी माता!"

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