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पंचांग : परिघ योग

परिघ योग भारतीय पंचांग में एक विशेष योग है, जो आमतौर पर अशुभ माना जाता है। "परिघ" का अर्थ होता है "बाधा" या "अवरोध," और इस योग में किए गए कार्यों में अवरोधों और विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। इस कारण से, परिघ योग में शुभ कार्यों को टालना उचित माना गया है।

परिघ योग के प्रभाव और विशेषताएं

अवरोध और बाधाओं का योग: परिघ योग में किसी भी कार्य में अवरोध, रुकावटें और कठिनाइयों का अनुभव हो सकता है। अनबन और विवाद: इस योग में संबंधों में अनबन, मनमुटाव, और विवाद होने की संभावना होती है। इस कारण विवाह, व्यापारिक साझेदारी या कोई भी अन्य सामाजिक कार्य करने से बचना चाहिए। मानसिक तनाव और अस्थिरता: इस योग का प्रभाव मानसिक अस्थिरता और बेचैनी बढ़ा सकता है, इसलिए मानसिक शांति बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए। धार्मिक कार्यों से दूर रहें: धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ के लिए यह समय उपयुक्त नहीं माना गया है।

परिघ योग में क्या न करें

शुभ कार्य टालें: विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार आरंभ, नए प्रोजेक्ट की शुरुआत आदि शुभ कार्यों से परिघ योग के दौरान बचना चाहिए। महत्वपूर्ण निर्णय न लें: इस समय बड़े निर्णय लेने से बचें, क्योंकि इसमें गलतियों और बाधाओं की संभावना अधिक होती है। सामाजिक और व्यावसायिक सौदों में सावधानी: किसी भी नई साझेदारी, निवेश, या वित्तीय लेन-देन करने में सावधानी बरतें।

परिघ योग का महत्व

परिघ योग को अवरोध और संकट का सूचक माना गया है, और इसे ज्योतिष में एक अशुभ योग के रूप में देखा जाता है। इस योग के दौरान कार्यों में सफल होने की संभावना कम होती है, और अधिक प्रयास के बावजूद परिणाम अच्छे नहीं मिलते। अतः इस समय का उपयोग आत्म-निरीक्षण, योजना बनाने और भविष्य की रणनीतियों पर काम करने के लिए करना चाहिए। परिघ योग में सावधानी बरतने और अपनी योजनाओं को स्थगित करने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं, इसलिए यह समय धैर्य और संयम के साथ व्यतीत करना उचित माना जाता है।
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