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अल्लाह की ध्वजा नहीं आई हो माँ -शहनाज अख्तर

तीन ध्वजा तीनो लोक से आई आल्हा की ध्वजा नहीं आई हो मां जाओ जाओ मेरे बिरहा हो लंगुरवा आल्हा को पकड़ ले आओ हो मां अरे एक बन नाके दूजा बन नाके तीज़े बन महोवा लोक हो माँ तीन ध्वजा तीनो लोक से आई आल्हा की ध्वजा नहीं आई हो मां गाव की पनहरिस से पूछे हो लंगुरवा आल्हा का पता बतलाओ हो माँ अरे बिच में होवे आल्हा को मकनवा वही पर डेर लगाओ हो माँ तीन ध्वजा तीनो लोक से आई आल्हा की ध्वजा नहीं आई हो मां आल्हा आल्हा खूब पुकारा आल्हा नदियों के घाट हो माँ बांध लंघोटी आल्हा नहा रहे सरसों को तेल लगाये हो माँ तीन ध्वजा तीनो लोक से आई आल्हा की ध्वजा नहीं आई हो मां
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