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गर्म
प्रकृति

शंकर साथ चल दो ना लिरिक्स

सब कुछ ही तूमने बनाया है और सब मे बाट दिया खुद का कुछ ना रक्खा सबकुछ ही त्याग दिया देवो को जिसने महल दिए रहवासी वो वन का कुबेर पे है कृपा जिसकी लोभी ना वो धन का तुम लोभ से दूर रहों शंकर मुझे लोभ तुम्हारा है तेरा नाम ही जपते रहता हु ये रोग हमारा है अभिलाषा जीवन काल की बस शंकर का भजन करू माया संसार से मुक्त करो अब कितने जतन करु शंकर साथ चल दो ना हा मुझसे बात करलों ना मेरा साया ही बन जाओ मुझी मे वास करलों ना वृषभ नंदी से वर जैसे तेरे चरणों मे खो जाऊ विषंगी नाग राजा सा तेरा संगी मे हो जाऊ
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