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महा शिवरात्रि पूजन पौराणिक व्रत कथा

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महा शिवरात्रि का व्रत भगवान शिव को समर्पित है और यह फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का पावन मिलन हुआ था। महाशिवरात्रि का व्रत विशेष रूप से भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने, पापों के नाश और मोक्ष की प्राप्ति के लिए किया जाता है।

पौराणिक व्रत कथा

सृष्टि की रचना और शिवलिंग की महिमा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार ब्रह्मा और विष्णु के बीच यह विवाद उत्पन्न हुआ कि उनमें से श्रेष्ठ कौन है। विवाद इतना बढ़ गया कि सभी देवता इसे सुलझाने में असमर्थ हो गए। तब भगवान शिव ने एक विशाल अग्नि स्तंभ (ज्योतिर्लिंग) का रूप धारण किया, जो आकाश से पाताल तक फैला हुआ था।

भगवान शिव ने कहा, "जो इस अग्नि स्तंभ का आदि या अंत ढूंढ लेगा, वही श्रेष्ठ होगा।"

भगवान विष्णु वराह का रूप धारण करके पाताल की ओर गए, जबकि ब्रह्मा हंस का रूप धारण करके आकाश की ओर। लेकिन कोई भी स्तंभ का आदि या अंत नहीं ढूंढ सका।

इस प्रकार, सभी ने भगवान शिव की महिमा को स्वीकार किया। इस घटना के उपलक्ष्य में महा शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है।

लकड़हारे की कथा

एक अन्य कथा के अनुसार, एक बार एक निर्धन लकड़हारा जंगल में लकड़ी काटने गया। दिनभर काम करने के बाद, रात होने पर वह डर के कारण एक पेड़ पर चढ़ गया। वह पेड़ बेलपत्र का था। नीचे एक शिवलिंग स्थित था।

रातभर लकड़हारे ने भूख-प्यास के कारण जागते हुए बेलपत्र तोड़कर नीचे फेंके। अनजाने में वह बेलपत्र शिवलिंग पर गिरते रहे। उसने जागरण करते हुए शिवलिंग पर जल भी अर्पित किया।

सुबह होते ही भगवान शिव प्रसन्न हुए और लकड़हारे को वरदान देकर सभी पापों से मुक्त कर दिया। यही घटना महा शिवरात्रि व्रत के जागरण की महिमा को प्रकट करती है।

महा शिवरात्रि व्रत की विधि

  • स्नान और शुद्धि: प्रातःकाल गंगा जल या शुद्ध जल से स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • व्रत का संकल्प: भगवान शिव के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
  • शिवलिंग का पूजन: शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद, घी, और गंगा जल से अभिषेक करें।
  • पूजन सामग्री: बेलपत्र, धतूरा, भस्म, चंदन, धूप, दीपक, और फल-फूल चढ़ाएं।
  • मंत्र जाप:ॐ नमः शिवाय ,महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
  • व्रत और जागरण: दिनभर व्रत रखें और रात्रि में भगवान शिव की पूजा के साथ भजन-कीर्तन करें।
  • आरती और प्रसाद: शिव जी की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
  • पारण: अगले दिन ब्राह्मणों को भोजन कराकर और दान देकर व्रत का पारण करें।

व्रत का महत्व

  • महा शिवरात्रि व्रत से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।
  • भगवान शिव की कृपा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
  • यह व्रत मोक्ष की प्राप्ति और जीवन में शांति लाने वाला है।
  • इस व्रत को विधिपूर्वक करने से भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
हर हर महादेव!
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