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अन्नपूर्णा माता व्रत कथा और विधि

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अन्नपूर्णा माता को अन्न की देवी माना जाता है। हिंदू धर्म में इन्हें माता पार्वती का ही एक रूप कहा गया है। उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विशेष रूप से अन्नपूर्णा माता का पालन किया जाता है। यह व्रत भोजन, समृद्धि और धन की प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। जो व्यक्ति इस व्रत को श्रद्धा से करता है, उसके घर में कभी भी अन्न-धन की कमी नहीं होती।

अन्नपूर्णा माता व्रत कथा

एक बार कैलाश पर्वत पर भगवान शिव और माता पार्वती के बीच एक वार्तालाप हुआ। माता पार्वती ने शिवजी से पूछा, "प्रभु, संसार का सबसे महत्वपूर्ण तत्व क्या है?" भगवान शिव ने कहा, "संसार में ज्ञान सबसे महत्वपूर्ण है। भोजन तो केवल एक नश्वर वस्तु है।" माता पार्वती को यह सुनकर दुख हुआ। उन्होंने सोचा कि यदि संसार में अन्न का महत्व नहीं है, तो लोगों का जीवन कैसे चलेगा? इस विचार के साथ माता पार्वती ने अपनी शक्ति से पूरे संसार से अन्न को अदृश्य कर दिया। जब अन्न समाप्त हो गया, तो धरती पर अकाल पड़ गया। जीव-जंतु और मनुष्य सभी भूख से त्रस्त हो गए। कोई भी प्राणी भोजन के बिना जीवित नहीं रह पा रहा था। सभी ने माता पार्वती से प्रार्थना की और उनसे अन्न की कृपा करने का आग्रह किया। माता पार्वती ने मानव जाति की करुण दशा को देखकर अन्न का पुनः प्रकट किया और स्वयं अन्नपूर्णा देवी के रूप में प्रकट हुईं। उन्होंने अपने भक्तों को भोजन कराया और उनके दुख दूर किए। भगवान शिव ने माता पार्वती की इस शक्ति और अन्न के महत्व को स्वीकार किया। उन्होंने कहा, "हे देवी, आप वास्तव में जगत की पालनकर्ता हैं। अन्न के बिना संसार में जीवन संभव नहीं है। आप अन्नपूर्णा के रूप में सभी की भूख शांत करती हैं।"

अन्नपूर्णा व्रत की विधि

व्रत का नियम

  • व्रत के दिन प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • घर के पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।

पूजा सामग्री

  • अन्नपूर्णा माता की मूर्ति या चित्र, दीपक, अगरबत्ती, रोली, अक्षत, लाल पुष्प, गंगाजल, फल, मिठाई, और अन्न।

पूजन विधि

  • माता अन्नपूर्णा की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएं।
  • उन्हें लाल पुष्प अर्पित करें और ताजे बने भोजन का भोग लगाएं।
  • "ॐ अन्नपूर्णायै नमः" मंत्र का जाप करें।
  • व्रत के दिन भूखे को भोजन कराना और दान करना अनिवार्य माना गया है।

व्रत पारण

  • अगले दिन किसी योग्य ब्राह्मण को भोजन कराएं और उसे वस्त्र एवं दान देकर व्रत का पारण करें।

अन्नपूर्णा माता व्रत का महत्व

  1. अन्न-धन की प्राप्ति:इस व्रत को करने से घर में कभी अन्न-धन की कमी नहीं होती।
  2. सुख-शांति का वास: व्रत से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
  3. भोजन का महत्व: यह व्रत हमें भोजन का महत्व समझाता है और हमें इसे व्यर्थ न करने की शिक्षा देता है।
  4. माता का आशीर्वाद:अन्नपूर्णा देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे जीवन में सभी इच्छाएँ पूरी होती हैं।

अन्नपूर्णा स्तुति

"अन्नपूर्णे सदापूर्णे शंकर प्राणवल्लभे। ज्ञान वैराग्य सिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति।।

"जय अन्नपूर्णा माता!"
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